Kuch-Meri-Kalam-Se-By-Shubh-Rajput

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कुछ मेरी कलम से: जनवरी की वो पहली मुलाकात

पुश का वह महीना, शर्दियों का शितम कहने को बातें हज़ार थीं 🌨️ मन में थे सवाल कई, उलझनें भी बेसुमार थीं!! ❓💭

था सुकून दिल को, संभल जाएगा अब(2), पर गिरने को बिजली बन के तैयार थी!! ⚡🌧️ सावला रंग, सुंदर नयन, वो मोम सी पिघलती मुस्कान थी 😊 उफ़, मैं किसे कहूं, मेरे सामने, मेरी कल की पहचान थी!! 🌟

हां, कुछ खास नहीं थी मुलाकात हमारी, जज़्बातों में पिघल रही थी सारी बात हमारी 💞 ना तुमने कुछ कहा, ना मैंने कुछ सुना(2), पर गैरों में भी तुम्हे अपना चुना ✨ हां, था यकीं, सब संभल जाएगा, तू आ गई है तो, बालाओं का दौर अब टल जाएगा 💑💖

Kuch Meri Kalam Se