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Kachua Aur Khargosh Ki Kahani in Hindi in Short Brief

हमारे इस प्यारे से कहानी kachua aur khargosh ki kahani in hindi का मुख्य पात्र है एक कछुआ और दूसरा खरगोश, कछुआ जो के नार्मल हर चीज़ में स्लो होता है तो वही खरगोश बहुत अधिक फुर्ती और चंचलता के लिए जाना जाता है।

आज की हमारी कहानी kachua aur khargosh ki kahani in hindi है एक ऐसी स्टोरी के बारे में जिसे आपको जीवन के बहुत हे अहम लेशन की जानकारी मिलेगी और आपको ये कहानी सही राह दिखाएगी। हम आज पढ़ने वाले है कहानी कछुआ और खरगोश के बारे में, जो के बेहद ही प्रसिद्ध कहानी है।

कछुआ और खरगोश की कहानी हिंदी में

एक बार की बात है के एक नदी के किनारे दो वन्य जीव एक पानी में रहने वाला कछुआ और दुसरा ज़मीन पर रहने वाला खरगोश रहता था, दोनों अपनी जरुरत के मुताबिक नदी के किनारे पर आते थे कछुआ धुप सेकने तो खरगोश नदी के पानी से अपनी प्यास बुझाने। धीरे धीरे दोनों में मित्रता हो गयी और दोनों अच्छे दोस्त बन गए, परन्तु खरगोश ने देखा कि कछुआ अपनी चाल में बहुत ही ज्यादा स्लो है, फिर क्या था वो लगा उसका मज़ाक उड़ाने, खरगोश को जब मौका मिलता वो उसका जी भर के उपहास उड़ाता था, कछुआ ये देख कर बहुत उदास हो जाता था।

Kachua Aur Khargosh Ki Kahani in Hindi

दरअसल खरगोश को अपनी तेज़ चाल पर बहुत अधिक घमंड था उसको लगता था कि उस से ज्यादा तेज कोई चल ही नहीं सकता है, तो उसने कछुए को निचा दिखाने के लिए उसके सामने रेस लगाने का प्रस्ताव रखा, उसने सोचा के कछुआ अपनी धीमी रफ़्तार के वजह से हार जायेगा। कछुए ने भी उसे निराश नहीं किया और उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

धीरे धीरे यह बात जंगल में आग की तरह फैल गयी, और जंगल के सभी जानवर इस रेस का लुफ्त उठाने के लिए एकत्रित हो गए। सब को यही प्रतीत हो रहा था के रेस तो ख़रगोश ही जीतेगा।

kachua Aur Khargosh Ki Kahani in Hindi Turning Point

परन्तु होने वाला था बिलकुल इसके विपरीत, रेस आरम्भ हुआ और देखते ही देखते खरगोश अपनी फुल रफ़्तार से वहां से ओझल हो गया, और कछुआ अपनी धीमी रफ़्तार से चलता रहा। कुछ दूर पहुंचने पर उसे एक गाजर का खेत दिखयी दिया उसने सोचा के कछुआ तो अभी बहुत पीछे है, जब तक वो यहाँ पहुंचेगा तब तक क्यों न थोड़ा गाजर खा के विश्राम किया जाये, और विश्राम करते करते उसे वही नींद आ गयी जबकि कछुआ अपनी लक्ष्य की और निरंतर बढ़ता रहा।

जब खरगोश की नींद खुली तो उसने देखा कि कछुआ तो लक्ष्य तक पहुँचने वाला है, उसने उठकर दौरना चालू किया पर जब तक बहुत देर हो चुकी थी। और कछुआ अपनी लक्ष्य की प्राप्ति कर चूका था, और उसने खरगोश को इस रेस में हरा दिया। अब अपनी हार देखकर खरगोश का सारा घमंड चकनाचूर हो चुका था।

kachua aur khargosh ki kahani in hindi हमने क्या सीखा? – तो हमें इस कहानी से यही शिक्षा मिलती है के हमें कभी भी अपने आप पर घमंड नहीं करना चाहिए

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Kachua Aur Khargosh Ki Kahani English Me Bhee Padhe

Once upon a time, two wild animals lived on the banks of a river, a water turtle and a rabbit living on the land. Both used to come on the banks of the river as per their requirement, when the turtle roamed the sun, the rabbits quenched their thirst with the water of the river. Both became good friends, but the rabbit saw that the turtle was too slow in his gait. Then what was it that he started to joke about, when the rabbit got a chance he used to ridicule him a lot, he was very sad to see the turtle.

In fact, the rabbit was very proud of his speed, he thought that no one could walk faster than him. So he proposed to race in front of the turtle to make him look inferior. He thought that the tortoise would lose due to its slow speed.

The turtle also did not disappoint him and accepted his offer. Gradually this thing spread like a forest fire, and all the animals of the forest gathered to enjoy this race. It seemed to everyone that the rabbit would win the race.

Kachua Aur Khargosh Ki Kahani in Hindi

Turning Point of Story kachua and Khargosh

But the opposite was about to happen, the race started and the rabbit disappeared from it at full speed and the turtle kept going at its slow pace. On reaching some distance, he saw a carrot field. He thought that the tortoise was still far behind by the time he reached here, so he should rest after eating some carrots. And while resting he got the same sleep while the tortoise continued towards its target.

When the rabbit woke up, he saw that the turtle was about to reach the target, he got up and started walking but it was too late. And the turtle had reached its target, and he defeated the rabbit in this race, after seeing his defeat, the whole pride of the rabbit was shattered.

What did we learn from kachua aur khargosh ki kahani in hindi? – So we get the lesson from this story that we should never boast about ourselves.


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